छत्तीसगढ़

नक्सल प्रभावित सालातोंग में बहने लगी विकास की धारा, हर घर पहुंचा नल जल

रायपुर: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के नक्सल प्रभावित ग्राम सालातोंग में अब विकास की नई कहानी लिखी जा रही है। वर्षों से पेयजल संकट से जूझ रहे इस दूरस्थ गांव में अब हर घर तक स्वच्छ पानी पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना *जल जीवन मिशन* ने इस बदलाव को संभव बनाया है। कोंटा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाला सालातोंग गांव, जो कोंटा से करीब 100 किलोमीटर और जिला मुख्यालय सुकमा से लगभग 90 किलोमीटर दूर स्थित है, लंबे समय से नक्सल प्रभाव और जल संकट की दोहरी मार झेल रहा था।

गांव के करीब 80 परिवार पहले एक छोटे नाले पर निर्भर थे। गर्मियों में जलस्तर घटने से हालात और भी गंभीर हो जाते थे, जिससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को दूर-दूर तक पानी लाना पड़ता था।

अब *जल जीवन मिशन* के तहत गांव में 100 नल कनेक्शन देने का लक्ष्य पूरा किया जा रहा है। इसके तहत हर घर में नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल पहुंच रहा है, जिससे न केवल पानी की समस्या खत्म हुई है बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य में भी सुधार देखने को मिला है। जलजनित बीमारियों में कमी आई है और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आया है।

योजना के तहत जल संरक्षण और जल गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गांव में सोलर आधारित जल प्रणाली और हैंडपंप के पानी की नियमित जांच की जा रही है। इस कार्य में “जल बहिनियाँ” अहम भूमिका निभा रही हैं, जिनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन और स्थानीय शिक्षित महिलाएं शामिल हैं। इन्हें विशेष प्रशिक्षण देकर सशक्त बनाया गया है ताकि वे स्वयं पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित कर सकें।

ग्रामीणों ने सरकार और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता। घर में ही स्वच्छ पानी मिलने से उनका जीवन पहले से अधिक आसान और सुरक्षित हो गया है।

सालातोंग की यह कहानी दिखाती है कि जब योजनाएं सही तरीके से ज़मीन पर उतरती हैं, तो नक्सल प्रभावित और दूरस्थ क्षेत्रों में भी विकास की रोशनी पहुंच सकती है।

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