15 से 17 वर्ष के बच्चों का आधार हो सकता है निष्क्रिय, समय पर बायोमेट्रिक अपडेट नहीं कराने पर बढ़ रही परेशानी

नई दिल्ली: देशभर में बड़ी संख्या में ऐसे मामलों की जानकारी सामने आ रही है, जिनमें 15 से 17 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के आधार कार्ड निष्क्रिय या सत्यापन में असफल पाए जा रहे हैं। इसकी मुख्य वजह निर्धारित आयु पर अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट नहीं कराया जाना बताया जा रहा है। स्थिति यह है कि कई अभिभावकों को स्कूल प्रवेश, छात्रवृत्ति, प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी योजनाओं के लाभ लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के नियमों के अनुसार बच्चों के आधार कार्ड में दो चरणों में बायोमेट्रिक अपडेट कराना अनिवार्य होता है। पहला अपडेट पांच वर्ष की आयु पूरी होने पर और दूसरा 15 वर्ष की आयु में कराया जाता है। शुरुआती वर्षों में बच्चों के फिंगरप्रिंट और आइरिस डेटा स्थायी नहीं माने जाते, इसलिए छोटे बच्चों के आधार में केवल फोटो और जनसांख्यिकीय जानकारी दर्ज की जाती है। उम्र बढ़ने के साथ बायोमेट्रिक डेटा में बदलाव आता है, जिसके कारण समय पर अपडेट नहीं होने पर आधार सत्यापन प्रभावित होने लगता है।
हाल के महीनों में कई राज्यों से ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां आधार प्रमाणीकरण विफल होने के कारण विद्यार्थियों को विभिन्न सेवाओं में कठिनाई हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया, बोर्ड परीक्षाओं के पंजीकरण, छात्रवृत्ति वितरण और बैंकिंग सेवाओं में आधार आधारित सत्यापन की अनिवार्यता बढ़ने से यह समस्या अधिक गंभीर बनती जा रही है।
यूआईडीएआई ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों का बायोमेट्रिक अपडेट समय पर अवश्य कराएं। पांच वर्ष और 15 वर्ष की आयु पर किया जाने वाला यह अपडेट पूरी तरह निशुल्क होता है। इसके लिए नजदीकी आधार सेवा केंद्र या अधिकृत नामांकन केंद्र पर जाकर प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि अपडेट में देरी होने पर आधार निष्क्रिय होने या प्रमाणीकरण में त्रुटि आने की संभावना बढ़ जाती है।
तकनीकी विशेषज्ञों के मुताबिक, आधार प्रणाली में बायोमेट्रिक पहचान बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि पुराने फिंगरप्रिंट या आइरिस डेटा वर्तमान स्थिति से मेल नहीं खाते, तो सिस्टम प्रमाणीकरण को अस्वीकार कर सकता है। यही कारण है कि किशोरावस्था में पहुंचने वाले बच्चों के लिए बायोमेट्रिक अपडेट आवश्यक माना गया है।
साइबर और डिजिटल पहचान मामलों के जानकारों का कहना है कि देश में डिजिटल सेवाओं का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में आधार की वैधता और अपडेटेड जानकारी बनाए रखना आवश्यक हो गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूलों और स्थानीय प्रशासन के माध्यम से व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए ताकि अभिभावक समय रहते आवश्यक अपडेट करा सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर बायोमेट्रिक अपडेट नहीं कराया गया, तो भविष्य में विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्रवेश, प्रतियोगी परीक्षाओं और डिजिटल सेवाओं में और अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में अभिभावकों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे बच्चों के आधार रिकॉर्ड की स्थिति नियमित रूप से जांचते रहें और आवश्यक अपडेट प्रक्रिया समय पर पूरी करें।
