भारतवारदात

ऑपरेशन ब्लैक हॉक में अंतरराज्यीय हेरोइन तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़, 18.64 किलो कच्ची हेरोइन जब्त

असम से उत्तर प्रदेश तक फैले तस्करी नेटवर्क पर केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई, तीन गिरफ्तार; कार के ईंधन टैंक और ट्रक के गुप्त कक्ष में छिपाकर लाई जा रही थी खेप

नई दिल्ली: मादक पदार्थों की अंतरराज्यीय तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) की मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश इकाइयों ने संयुक्त अभियान ‘ऑपरेशन ब्लैक हॉक’ के तहत 18.64 किलोग्राम कच्ची हेरोइन जब्त की है। लगातार चलाए गए अभियान में अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क के तीन प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रतिबंधित मादक पदार्थ की यह खेप पूर्वोत्तर क्षेत्र से उत्तर प्रदेश लाई जा रही थी और इसे राज्य में खपाने की योजना थी।

केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के अधिकारियों के अनुसार, मध्य प्रदेश इकाई को पूर्वोत्तर क्षेत्र से लखनऊ तक मादक पदार्थों की आवाजाही के संबंध में महत्वपूर्ण और सटीक खुफिया जानकारी प्राप्त हुई थी। इस सूचना के आधार पर सीबीएन की मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश इकाइयों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की रणनीति तैयार की। 20 और 21 अगस्त 2026 की मध्य रात्रि से सुल्तानपुर-लखनऊ राजमार्ग पर संदिग्ध वाहनों की निगरानी और घेराबंदी शुरू की गई। कई टोल प्लाजा पर वाहनों की आवाजाही पर लगातार नजर रखी गई।

खाली कार के ईंधन टैंक में छिपी थी 16.46 किलो हेरोइन
निगरानी अभियान के दौरान 21 अगस्त को लखनऊ के पास असम में पंजीकृत एक हुंडई क्रेटा को सीबीएन की स्ट्राइक टीम ने रोककर तलाशी ली। प्रारंभिक जांच में कार खाली दिखाई दी और उसमें सवार दोनों व्यक्तियों ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए किसी भी तरह की जानकारी से इनकार किया। हालांकि, पूछताछ के दौरान उनके बयानों और यात्रा से जुड़ी जानकारी में विसंगतियां सामने आईं।

अधिकारियों को विशेष रूप से तब संदेह हुआ, जब कार सवारों ने बताया कि करीब 500 किलोमीटर की दूरी तय करने के दौरान वाहन में चार बार ईंधन भरवाया गया था। इस जानकारी के बाद अधिकारियों ने कार के ईंधन टैंक की भौतिक जांच की। जांच के दौरान ईंधन टैंक से असामान्य और खोखली आवाज सुनाई दी, जिससे अधिकारियों का संदेह और गहरा गया।

इसके बाद वाहन को लखनऊ स्थित केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के कार्यालय ले जाया गया। तकनीकी सहायता से ईंधन टैंक को खोला गया तो उसके भीतर विशेष रूप से तैयार किया गया एक गुप्त डिब्बा मिला। इस डिब्बे में 25 वाटरप्रूफ पैकेट रखे हुए थे। जांच में इन पैकेटों में कुल 16.46 किलोग्राम कच्ची हेरोइन बरामद हुई। इसके बाद कार में सवार दोनों संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया।

सिलीगुड़ी-लखनऊ कॉरिडोर पर ट्रक से 2.16 किलो हेरोइन बरामद
अभियान के दौरान सीबीएन उत्तर प्रदेश इकाई को एक अन्य महत्वपूर्ण खुफिया सूचना मिली। सूचना में बताया गया था कि सिलीगुड़ी-लखनऊ कॉरिडोर पर एक भारी वाणिज्यिक ट्रक के जरिए प्रतिबंधित मादक पदार्थ की खेप ले जाई जा रही है। सूचना के आधार पर सीबीएन की टीमों ने संबंधित वाहन की निगरानी शुरू की और विभिन्न टोल प्लाजा से गुजरने के दौरान उसका पीछा किया।

टीम ने आखिरकार ट्रक को बाराबंकी के पास रोक लिया। वाहन की गहन तलाशी के दौरान उसके ढांचे के भीतर विशेष रूप से तैयार किए गए एक गुप्त कक्ष का पता चला। इस गुप्त कक्ष में 2.16 किलोग्राम कच्ची हेरोइन छिपाकर रखी गई थी। बरामदगी के बाद ट्रक को जब्त कर लिया गया और मामले में एक अन्य संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया।

इस प्रकार दोनों अलग-अलग कार्रवाइयों में कुल 18.64 किलोग्राम कच्ची हेरोइन बरामद की गई। सीबीएन ने दोनों वाहनों को भी जब्त कर लिया है।

तस्करों ने अपनाए थे बेहद छिपे हुए तरीके
जांच में सामने आए तथ्यों से पता चलता है कि तस्करी नेटवर्क ने मादक पदार्थों को सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचाने के लिए वाहनों में विशेष रूप से बनाए गए गुप्त स्थानों का इस्तेमाल किया। हुंडई क्रेटा के ईंधन टैंक में कृत्रिम स्थान बनाकर उसके भीतर मादक पदार्थ के पैकेट छिपाए गए थे। इसी तरह भारी वाणिज्यिक वाहन में भी वाहन के ढांचे के भीतर एक विशेष गुप्त कक्ष तैयार किया गया था।

सीबीएन अधिकारियों की सतर्कता और खुफिया सूचना के आधार पर की गई तकनीकी जांच के कारण इन छिपे हुए स्थानों का पता लगाया जा सका। अधिकारियों का मानना है कि तस्करी नेटवर्क लंबे समय से पूर्वोत्तर क्षेत्र से उत्तर प्रदेश तक मादक पदार्थों की आपूर्ति के लिए विभिन्न परिवहन माध्यमों का इस्तेमाल कर रहा हो सकता है।

तीनों आरोपियों पर एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामला
गिरफ्तार किए गए तीनों संदिग्धों के खिलाफ मादक औषधि एवं मनोविकृत पदार्थ अधिनियम, 1985 की संबंधित कड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। प्रतिबंधित मादक पदार्थ की पूरी खेप और उसके परिवहन में इस्तेमाल किए गए दोनों वाहनों को जब्त कर लिया गया है।

सीबीएन अब इस नेटवर्क के पीछे मौजूद मुख्य आपूर्तिकर्ताओं और अन्य सहयोगियों का पता लगाने में जुटा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि पूर्वोत्तर क्षेत्र से मादक पदार्थ की खेप किस स्रोत से भेजी गई थी, उत्तर प्रदेश में इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था और इसके वितरण के लिए कौन-कौन से संपर्क एवं परिवहन माध्यम इस्तेमाल किए जा रहे थे।

वित्तीय और लॉजिस्टिक नेटवर्क की भी जांच
मामले की जांच केवल जब्त की गई खेप और गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने नेटवर्क के वित्तीय और लॉजिस्टिक चैनलों की भी व्यापक जांच शुरू की है। जांच का उद्देश्य तस्करी से जुड़े धन के लेन-देन, परिवहन व्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान करना है।

जांच एजेंसियां पूर्वोत्तर क्षेत्र में मौजूद संभावित मुख्य आपूर्तिकर्ताओं तक पहुंचने तथा उनके उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में सक्रिय वितरण नेटवर्क को उजागर करने का प्रयास कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई का व्यापक उद्देश्य केवल एक खेप को जब्त करना नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय पूरे तस्करी नेटवर्क को तोड़ना है।

‘ऑपरेशन ब्लैक हॉक’ में बड़ी बरामदगी
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की इस कार्रवाई में कुल 18.64 किलोग्राम कच्ची हेरोइन जब्त की गई। इसमें लखनऊ के पास कार से बरामद 16.46 किलोग्राम और बाराबंकी के पास ट्रक से बरामद 2.16 किलोग्राम मादक पदार्थ शामिल है। कार्रवाई में असम में पंजीकृत हुंडई क्रेटा और एक भारी वाणिज्यिक ट्रक जब्त किए गए हैं तथा कुल तीन संदिग्ध गिरफ्तार किए गए हैं।

सीबीएन की कार्रवाई से यह भी स्पष्ट हुआ है कि मादक पदार्थ तस्कर सुरक्षा जांच से बचने के लिए वाहनों के ईंधन टैंक और ढांचे में गुप्त कक्ष बनाने जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान, तकनीकी जांच और विभिन्न राज्यों की एजेंसियों के बीच समन्वय तस्करी नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।

केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की जांच अब इस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों, मुख्य आपूर्तिकर्ताओं, वित्तीय लेन-देन और वितरण चैनलों तक पहुंचने पर केंद्रित है। अधिकारियों को उम्मीद है कि पूछताछ और आगे की जांच से पूर्वोत्तर से उत्तर प्रदेश तक सक्रिय अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी के नेटवर्क की और महत्वपूर्ण कड़ियां सामने आ सकती हैं।

Related Articles

Back to top button