छत्तीसगढ़

भूपेश सरकार की गोधन न्याय योजना ले रही अंतिम साँस, पशु पालक परेशान… अधिकारी सरकार को कर रहे बदनाम

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जनहित में ग्रामीणजनों के आर्थिक सुद्ढ़ता हेतु गोधन योजना का शुभारंभ गत् वर्ष किया गया था। इसके अंतर्गत् ग्रामीणजनों से क्रय किए जाने वाले गोबर में व्याप्त अनियमितता के पशुपालक परेशान है।
इसकी शिकायत मुख्यमंत्री बघेल से राजेश सिंह ठाकुर पार्षद वार्ड क्रमांक 70 संत रविदास वार्ड, कमलेश वर्मा पार्षद वीर सावरकर नगर वार्ड तथा पशुपालक संध अध्यक्ष शालिक सिंह ठाकुर ने की है।

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पार्षदद्वय राजेश सिंह ठाकुर एवं कमलेश वर्मा ने पूर्व में मुख्यमंत्री व राज्य शासन के जनहितैषी योजना को अधिकारियों के द्वारा किस प्रकार असफल किया जा रहा है, उसका उल्लेख करते हुए बताया है कि जब ग्रामीणजनों को 2 दिन बाद 4 बाद गोबर लाने कहा जाता रहा है। उसके बाद गोबर न खरीदने के बहानेबाजी ढूढकर गोबर रखने हेतु जगह न होना बताया जा रहा था।

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उसमें भी अधिकारी इस योजना को असफल करने में सफल नहीं हुए तो उन्होने डेरी संचालक का नगर निगम में पंजीयन प्रमाण पत्र मांगा जाने लगा, जिसें जोन आयुक्त 8 द्वारा लगभग 20 गो पालकों को पत्र प्रेषित किया गया। ताकि पंजीयन न होने पर गोबर न खरीदना पड़ेे।
इस संबंध में नगरीय प्रशासन सचिव द्वारा भी निगम के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देशित किया गया कि गोबर बेचने के लिए आने वाले गोपालक व किसानों को किसी भी स्थिति में वापस न किया जावे। हीरापुर जरवाय खरीदी केन्द्र में लगभग 250 से 300 पशुपालक हितग्राही है, जिन्हें गोबर विक्रय करने हेतु भटकना पड़ता है।

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अनियमितता की पराकाष्ठा तब दस्तावेजों से प्रमाणित हो रही है जब जुलाई 2020 में गोबर क्रय किया जा रहा है था उन्हें फरवरी 2021 में गोपालन पंजीयन पशु विकास धन कार्यालय से कराने का फरमान् जारी किया गया। क्षेत्रीय गोपालक नगर निगम के समस्त नियम निेर्देशों को पालन कर रहे है फिर भी ऐन केन प्रकारेण गोबर क्रय न कर राज्य सरकार की असफलता को सिद्व करने लगे हुए है।

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चूंकि अब 21 मई से राज्य सरकार अत्यंत विकराल महामारी व आर्थिक संकट के दौर से गुजरने के बाद भी किसानों के हित में राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत सबसिडी राशि का भुगतान कर रही है, ऐसी स्थिति में गोबर खरीदने से रोकने वाले अधिकारियों के विरूद्व समुचित कार्यवाही किये जाने की मांग करते हुए क्षेत्रीय गोपालक ऐसा न किये जाने पर लाॅकडाउन के बाद धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगें।

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