AAP में सबसे बड़ी टूट! राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों का इस्तीफा, BJP में विलय का दावा

नई दिल्ली: देश की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा भूचाल उस वक्त आ गया, जब आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख चेहरों में शामिल राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का ऐलान कर दिया। राघव चड्ढा ने दावा किया है कि राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई से अधिक सांसद उनके साथ हैं और संवैधानिक प्रावधानों के तहत BJP में विलय की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा ऐलान
दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा के साथ राज्यसभा सांसद संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी मौजूद रहे। चड्ढा ने कहा कि AAP अब अपने मूल सिद्धांतों और “ईमानदार राजनीति” के रास्ते से भटक चुकी है। उन्होंने खुद को “गलत पार्टी में सही आदमी” बताते हुए कहा कि अब पार्टी देशहित नहीं, बल्कि निजी हितों के लिए काम कर रही है।
राघव चड्ढा ने कहा, “मैंने पार्टी को अपने खून-पसीने और 15 साल की मेहनत से खड़ा किया, लेकिन अब उसकी विचारधारा पूरी तरह बदल चुकी है।”
किन सांसदों ने छोड़ा AAP?
राघव चड्ढा ने दावा किया कि उनके साथ कई अन्य राज्यसभा सांसद भी BJP में शामिल हो रहे हैं। इनमें हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रमजीत साहनी, राजेंद्र गुप्ता, संदीप पाठक और अशोक मित्तल के नाम शामिल बताए गए हैं।
AAP के पास राज्यसभा में कुल 10 सांसद थे। यदि राघव चड्ढा का दावा सही साबित होता है, तो पार्टी की संख्या सीधे घटकर तीन के आसपास रह जाएगी।
संसद में AAP की ताकत आधी से भी कम
राज्यसभा में AAP की मौजूदगी मुख्य रूप से पंजाब और दिल्ली से चुने गए सांसदों पर आधारित रही है। पार्टी के पास अब तक 10 सदस्य थे, जिनमें पंजाब से 7 और दिल्ली से 3 सांसद थे। लेकिन इस बगावत के बाद AAP की संसदीय ताकत को सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इससे राज्यसभा में AAP की प्रभावशीलता कमजोर हो सकती है, जबकि BJP को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है।
आखिर क्यों टूटा AAP का बड़ा चेहरा?
सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राघव चड्ढा और पार्टी नेतृत्व के बीच पिछले कई महीनों से तनाव चल रहा था। हाल ही में उन्हें राज्यसभा में AAP के उपनेता पद से हटाया गया था और उनकी जगह अशोक मित्तल को जिम्मेदारी दी गई थी।
बताया जा रहा है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद संगठन के भीतर असंतोष बढ़ गया था। संदीप पाठक जैसे नेताओं को भी रणनीतिक फैसलों से दूर किए जाने की चर्चा थी।
BJP के लिए बड़ा राजनीतिक फायदा
राघव चड्ढा लंबे समय तक AAP का युवा और आक्रामक चेहरा माने जाते रहे हैं। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता से लेकर राज्यसभा सांसद तक, उन्होंने AAP के विस्तार में अहम भूमिका निभाई थी।
ऐसे में उनका BJP में जाना सिर्फ एक इस्तीफा नहीं, बल्कि विपक्षी राजनीति के लिए बड़ा संदेश माना जा रहा है। खासकर पंजाब और दिल्ली की राजनीति पर इसका असर पड़ सकता है।
AAP की ओर से पलटवार
रिपोर्ट्स के मुताबिक, AAP नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को “विश्वासघात” करार दिया है। पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि BJP विपक्षी दलों के नेताओं को तोड़ने की राजनीति कर रही है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या राघव चड्ढा का “दो-तिहाई सांसद” वाला दावा संवैधानिक रूप से मान्य हो पाता है या नहीं। यदि ऐसा होता है, तो यह AAP के इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक टूट साबित हो सकती है।
