12 साल विश्वास के, विकास के, जन-कल्याण के; भारत के विकास का आधार: आधारभूत संरचना

पिछले एक दशक में भारत ने आधारभूत संरचना विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है। परिवहन, आवास, जल, ऊर्जा, डिजिटल नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश के कारण देश की विकास गति तेज हुई है। सड़क, रेलवे, हवाई अड्डे, बंदरगाह, जलमार्ग, मेट्रो नेटवर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने नागरिकों के जीवन स्तर, रोजगार, सेवाओं तक पहुंच और क्षेत्रीय संतुलन को भी मजबूत किया है।
प्रधानमंत्री गतिशक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, सागरमाला, भारतमाला, जल जीवन मिशन, उड़ान योजना और पीएम-वानी जैसी योजनाओं ने एक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और एकीकृत भारत की परिकल्पना को नई दिशा दी है। इन पहलों ने विकास को केवल महानगरों तक सीमित न रखकर गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाया है।
राष्ट्र निर्माण का आधार बनी आधारभूत संरचना
आज आधारभूत संरचना देश के नागरिकों के दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। सड़कें, रेलवे, बिजली, जल आपूर्ति, डिजिटल सेवाएं और आवास योजनाएं आम लोगों की जीवनशैली को बदल रही हैं। वर्ष 2014 के बाद सरकार ने आधारभूत संरचना विकास को दीर्घकालिक राष्ट्रीय निर्माण की दृष्टि से आगे बढ़ाया है।
सार्वजनिक पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 2014-15 में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में 12.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह निवेश देशभर में कनेक्टिविटी, उद्योग, आवास और सार्वजनिक सेवाओं के विस्तार में सहायक बना है।

रेलवे में आधुनिकता और सुरक्षा
भारतीय रेलवे में पिछले वर्षों में व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। रेलवे के बजट आवंटन में कई गुना वृद्धि हुई है, जिससे ट्रैक विस्तार, विद्युतीकरण, स्टेशन पुनर्विकास और हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं को गति मिली है।
मार्च 2026 तक रेलवे नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका है। इससे ऊर्जा दक्षता बढ़ी है और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हुई है। वंदे भारत ट्रेनों ने भारतीय रेल यात्रा को आधुनिक स्वरूप दिया है। अप्रैल 2026 तक देश में 162 वंदे भारत सेवाएं संचालित हो रही हैं।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर भारत के पहले बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। इसके साथ ही अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देशभर के 1,338 रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण का कार्य जारी है।
रेल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ‘कवच’ जैसी स्वदेशी स्वचालित सुरक्षा प्रणाली लागू की गई है। इस तकनीक के कारण रेल दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।

सड़क और राजमार्ग विकास
भारत का सड़क नेटवर्क दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क बन चुका है। राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 2014 में 91 हजार किलोमीटर से बढ़कर 2026 में लगभग 1.46 लाख किलोमीटर हो गई है। एक्सप्रेसवे और आर्थिक गलियारों ने माल परिवहन और यात्रा समय को कम किया है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत गांवों तक हर मौसम में उपयोग योग्य सड़कों की पहुंच सुनिश्चित की गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक पहुंच आसान हुई है।
अटल सुरंग, द्वारका एक्सप्रेसवे, दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर और सोनमर्ग सुरंग जैसी परियोजनाएं देश की इंजीनियरिंग क्षमता और रणनीतिक दृष्टि को दर्शाती हैं।

नागरिक उड्डयन का विस्तार
वर्ष 2014 के बाद भारत में नागरिक उड्डयन क्षेत्र में तीव्र विस्तार हुआ है। परिचालन हवाई अड्डों की संख्या 74 से बढ़कर 165 हो गई है। उड़ान योजना के माध्यम से छोटे शहरों को हवाई संपर्क से जोड़ा गया है।
डिजी यात्रा जैसी डिजिटल तकनीकों ने यात्रियों के अनुभव को आसान बनाया है। देश के दूरस्थ क्षेत्रों में हवाई सेवाओं के विस्तार से पर्यटन, व्यापार और निवेश को नई गति मिली है।
मेट्रो और शहरी परिवहन
भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश बन गया है। मेट्रो नेटवर्क की लंबाई 2014 में 248 किलोमीटर से बढ़कर 2026 में 1,155 किलोमीटर से अधिक हो गई है। दिल्ली-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल, कोलकाता की जलमग्न मेट्रो सुरंग और कोच्चि वाटर मेट्रो जैसी परियोजनाओं ने आधुनिक शहरी परिवहन को नई पहचान दी है।

बंदरगाह और जलमार्ग
भारत के बंदरगाहों की क्षमता और दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सागरमाला परियोजना ने बंदरगाह आधारित विकास को बढ़ावा दिया है। जहाजों के टर्नअराउंड समय में कमी आई है और माल परिवहन क्षमता बढ़ी है।
राष्ट्रीय जलमार्गों का विस्तार 5 से बढ़कर 111 तक पहुंच गया है। अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन अब माल ढुलाई और यात्री सेवाओं का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।
औद्योगिक और विनिर्माण आधारभूत संरचना
औद्योगिक पार्क, स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटी और प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना ने भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद की है।
देशभर में 4,220 से अधिक औद्योगिक पार्क विकसित किए गए हैं। पीएम मित्र पार्क, औद्योगिक गलियारे और बायोफार्मा शक्ति जैसी योजनाएं निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा दे रही हैं।
लॉजिस्टिक्स और प्रतिस्पर्धात्मकता
प्रधानमंत्री गतिशक्ति और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति ने भारत में माल परिवहन और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया है। यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP), फास्टैग और लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक जैसी डिजिटल प्रणालियों ने पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाई है। विश्व बैंक के लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक में भारत की रैंकिंग में भी सुधार हुआ है।

जल सुरक्षा और पेयजल
जल जीवन मिशन ने ग्रामीण भारत में पेयजल पहुंच में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। वर्ष 2019 में जहां केवल 17 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास नल जल कनेक्शन था, वहीं जून 2026 तक यह आंकड़ा लगभग 82 प्रतिशत तक पहुंच गया है। नमामि गंगे, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और केन-बेतवा लिंक परियोजना जैसी योजनाओं ने जल संरक्षण और सिंचाई अवसंरचना को मजबूत किया है।
आवास और शहरी विकास
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के माध्यम से करोड़ों परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराए गए हैं। इन योजनाओं ने महिलाओं के स्वामित्व अधिकार और वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा दिया है। अमृत मिशन और अमृत 2.0 के माध्यम से शहरों में जल आपूर्ति, सीवरेज और हरित क्षेत्रों का विस्तार किया गया है।
ऊर्जा और विद्युतीकरण
भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए हैं। देश की स्थापित विद्युत क्षमता 532 गीगावाट से अधिक हो चुकी है।
प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना, गोबरधन योजना और सौभाग्य योजना जैसी पहलों ने स्वच्छ ऊर्जा और सार्वभौमिक विद्युतीकरण को बढ़ावा दिया है।
डिजिटल इंडिया की मजबूत नींव
भारत की डिजिटल क्रांति ने शासन, बैंकिंग, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दी है। इंटरनेट और ब्रॉडबैंड कनेक्शन में कई गुना वृद्धि हुई है। यूपीआई दुनिया की सबसे बड़ी रियल टाइम भुगतान प्रणालियों में से एक बन चुका है। डिजिलॉकर, उमंग, सीएससी और ई-हॉस्पिटल जैसे प्लेटफॉर्म नागरिक सेवाओं को सरल और सुलभ बना रहे हैं।
विकसित भारत की ओर मजबूत कदम
पिछले बारह वर्षों में भारत का आधारभूत संरचना विकास केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा बना है। सड़क, रेल, जल, ऊर्जा और डिजिटल नेटवर्क ने भारत को एक आधुनिक, सक्षम और प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने में मदद की है।
इन आधारभूत संरचनाओं ने नए आर्थिक अवसर पैदा किए हैं, क्षेत्रीय असमानताओं को कम किया है और नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में यह मजबूत आधार आने वाले वर्षों में देश की प्रगति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

