‘नॉलेज स्टेट’ बनने की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़: उत्कृष्टता केंद्र योजना से युवाओं को मिलेगा ग्लोबल करियर का मंच
पारंपरिक डिग्रियों से आगे बढ़कर कौशल, रिसर्च और नवाचार आधारित शिक्षा पर सरकार का फोकस

रायपुर: छत्तीसगढ़ अब केवल प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक विरासत वाला राज्य भर नहीं रह गया है, बल्कि तेजी से एक ज्ञान-आधारित और कौशल-केंद्रित राज्य के रूप में अपनी नई पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई ‘उत्कृष्टता केंद्र (Center of Excellence) योजना’ इसी परिवर्तनकारी सोच का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक उच्च शिक्षा मॉडल को बदलकर युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करना है।
राज्य सरकार का मानना है कि 21वीं सदी की वैश्विक अर्थव्यवस्था में वही समाज आगे बढ़ेगा, जिसके पास आधुनिक तकनीकी ज्ञान, अनुसंधान क्षमता और नवाचार की ताकत होगी। इसी दृष्टि के साथ कॉलेजों को केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं, बल्कि आधुनिक करियर लॉन्चपैड के रूप में विकसित किया जा रहा है।
अब तक उच्च शिक्षा प्रणाली में सैद्धांतिक ज्ञान और उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के बीच बड़ी खाई महसूस की जाती रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल स्किलिंग, डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक तकनीकी कौशल की बढ़ती मांग के बीच ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के अनेक प्रतिभाशाली छात्र संसाधनों और मार्गदर्शन के अभाव में पीछे रह जाते थे। नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 की भावना के अनुरूप राज्य सरकार ने इसी अंतर को समाप्त करने के लिए बहु-विषयक और अनुसंधान आधारित संस्थानों के विकास का रोडमैप तैयार किया है।
योजना के तहत राज्य के 36 प्रमुख महाविद्यालयों, जिनमें 3 हजार से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन है, को चरणबद्ध तरीके से उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में 25 कॉलेजों के लिए प्रति कॉलेज 3 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जबकि अगले चरण में चयनित प्रमुख संस्थानों के लिए 15 करोड़ रुपये तक का विशेष वित्तीय प्रावधान रखा गया है। इसके साथ ही ‘राज्य रिसर्च एवं इनोवेशन योजना’ के माध्यम से प्राध्यापकों और विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर के शोध के लिए वित्तीय एवं प्रशासनिक सहयोग भी प्रदान किया जाएगा।
इन उत्कृष्टता केंद्रों का ढांचा पांच प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगा। इसके अंतर्गत विज्ञान, कंप्यूटर साइंस, तकनीकी एवं कृषि विषयों के लिए आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी ताकि विद्यार्थियों को ‘करके सीखने’ का अवसर मिले। हाई-स्पीड इंटरनेट, स्मार्ट क्लासरूम और ई-लाइब्रेरी से युक्त डिजिटल लर्निंग सेंटर विद्यार्थियों को वैश्विक ज्ञान संसाधनों से जोड़ेगा। रिसर्च एवं इनोवेशन लैब स्थानीय कृषि, जनजातीय कला, हर्बल चिकित्सा और खनन जैसे क्षेत्रों से जुड़े शोध को बढ़ावा देंगी, जिससे स्थानीय समस्याओं के समाधान को वैश्विक पहचान मिल सके।
इसके अलावा कोडिंग, आईटी स्किल, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और उद्यमिता आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को रोजगारोन्मुख बनाया जाएगा। विद्यार्थियों को इन-हाउस काउंसलिंग, कैंपस प्लेसमेंट और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) तथा बैंकिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी विशेष मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना व्यक्तिगत छात्रवृत्ति या ऋण आधारित मॉडल नहीं, बल्कि संस्थागत सशक्तिकरण पर आधारित है। चयनित कॉलेजों के नियमित छात्र बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इन सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए पंजीकरण और प्रशिक्षण प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य के भीतर ही राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध होने से विद्यार्थियों का बड़े महानगरों की ओर पलायन कम होगा। इससे स्थानीय स्तर पर उद्यमिता और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा तथा छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था ‘लोकल से ग्लोबल’ की दिशा में आगे बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के युवा प्रतिभाशाली हैं और यदि उन्हें आधुनिक संसाधन एवं सही अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो वे केवल रोजगार प्राप्त करने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले भी बन सकते हैं। सरकार की यह पहल युवाओं को आत्मनिर्भर और नवाचार-उन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
‘उत्कृष्टता केंद्र योजना’ को राज्य के शैक्षणिक इतिहास में एक निर्णायक पहल माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को एक मजबूत ‘नॉलेज स्टेट’ के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

