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वनोपज खरीदी में हुई गड़बड़ी को लेकर राज्यपाल ने वनमंत्री अकबर को लिखा पत्र, कड़े शब्दों में उठाए कई गंभीर सवाल

रायपुर. एक तरफ कोरोना से हाहाकार मचा हुआ है वहीं कई लोग आपदा में अवसर खोजकर जेब भरने में लगे है। छत्तीसगढ़ वनोपज खरीदी में हो रही अनियमितताओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मंगलवार को प्रदेश की राज्यपाल अनुसुईया उइके ने वनोपज खरीदी में हुई गड़बड़ी को संज्ञान में लेकर राज्यपाल ने सूबे के वनमंत्री मोहम्मद अकबर को कड़े शब्दों में चिट्ठी लिखकर कई गंभीर सवाल उठाए ।
वनोपज खरीदी में हुई गड़बड़ी को लेकर राज्यपाल ने तल्ख तेवर में सवाल उठाते हुए संग्राहकों की समस्याओं को दूर करने के निर्देश दिए हैं। अपनी इस चिठ्ठी में राज्यपाल ने वन मंत्री से कई सवाल पूछे हैं। जिसके बाद सरकार में हड़कंप मचा हुआ है।
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राज्यपाल ने निर्धारित लक्ष्य से कम खरीदी, वनोपज पर बोनस की राशि जल्द आदिवासियों को देने के अलावा कई निर्देश दिये हैं। साथ ही ये भी कहा है कि पत्र में दिये गये तथ्यों को जांचकर मंत्री तुरंत कार्यवाही करें। वास्तविक हालात की जानकारी तुरंत उन्हें दी जाए। राज्यपाल की इस चिट्ठी को लेकर अभी सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है, लेकिन इतना जरुर है कि वनोपज के मसले पर राज्यपाल के द्वारा कई बिन्दुओं में पूछे गये सवाल से सूबे में खलबली जरूर है।
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राज्यपाल के पत्र में इन बातों का है उल्लेख
निर्धारित लक्ष्य की तुलना में वनोपज की खरीदी कम की जा रही है. ईमली की 50 फीसदी भी खरीदी नहीं की गई. फूड ग्रेड महुआ 4000 क्विंटल का लक्ष्य था खरीदी बहुत कम की गई. तेंदूपत्ता की खरीदी पिछले सीजम में लक्ष्य से कम हुई, जिससे संग्राहकों को करोड़ों का नुकसान हुआ. लघु वनोपज सहकारी संघ में अव्यवस्था के कारण लगभग 1.50 लाख संग्राहक परिवारों ने संग्रहण कार्य नहीं किया. इस सीजन में आपदा के समय लक्ष्य के अनुरूप खरीदी की क्या व्यवस्था है. समितियों को दी जाने वाले लाभांश के 432 करोड़ रुपये लंबे समय से वनोपज संघ के पास हैं.
समितियों को राशि क्यों नहीं दी गई, क्या राज्य सरकार द्वारा लगभग 100 करोड़ रुपये संघ से वापसी की शर्त पर लिये गये थे ? सीजन 2018 की बोनस राशि कई संग्राहकों के खाते में बैंक द्वारा आज तक नहीं दी गई. सीजन 2019 की बोनस राशि की गणना अब तक पूरी नहीं की गई. सीजन 2020 की बोनस राशि की गणना अभी तक शुरू नहीं की गई. कोविड जैसी आपदा में संग्राहकों की जीवन सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था है.
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पूर्व में प्रबंधकों द्वारा क्या मांग की गयी थी. मांगों के निराकण हेतु संचालक मंडल की बैठक में पारित निर्णयों पर क्या कार्रवाई हुई? संग्राहक परिवारों के लिये टीकाकरण प्राथमिकता के आधार पर किये जाने पर विचार किया जा सकता है. जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के पूर्व के प्रकरण अभी तक लंबित हैं. लंबित प्रकरणों का जल्द निराकण किया जाए और वस्तुस्थिति क्या हैं. फंडमुंशियों के द्वारा प्रस्तुत मांगों के निराकरण पर क्या कार्यवाई की गई है.
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