छत्तीसगढ़

कोरोना से मृत शव को लेने के लिए 50 घंटों का करना पड़ा इंतज़ार, देर रात हुआ अंतिम संस्कार

गरियबंद। कोरोना संक्रमण से मृत शव को गरियाबंद मर्च्युरी से शव वाहन तक रखने कोई नहीं मिला इसके बाद किसी तरह ठेकेदार के प्राइवेट स्वीपर को राजी किया गया, तब जाकर 50 घंटे बाद अंतिम संस्कार किया गया|दरअसल मृतक के सभी परिजन कोरोना पॉजिटिव आने के बाद देवभोग से राजस्व विभाग की टीम गरियाबंद जिला अस्पताल पहुंची थी, कुछ प्रबंध नहीं होने के बाद टीम बैरंग लौट रही थी.

टीम 40 किमी के बाद दोबारा लौटी और मंगलवार रात 9 बजे अंतिम संस्कार करवाया| बरबहली ग्राम के 64 वर्षीय जयराम नेताम की मौत के 50 घण्टे बाद मंगलवार की रात 9 बजे गरियाबन्द में रात 9 बजे अंतिम संस्कार किया गया|रविवार शाम 7 बजे जयराम नेताम की मौत गरियाबंद कोविड अस्पताल लाते हुए रास्ते मे ही हो गई थी। अस्पताल प्रबन्धन बॉडी को 121 किमी दूर देवभोग के बरबहली भेजने के लिए मृतक परिवार के किसी भी सदस्य को आने की शर्त रख दी थी|

बेटे भारत व परमानन्द समेत परिवार के सभी 6 सदस्य कोरोना पॉजिटिव होने व आर्थिक तंगी का हवाला देकर सोमवार देर शाम प्रशासन को लिखित में दे दिया कि वे बॉडी लेने नहीं जा सकते न ही अंतिम संस्कार कराने में सक्षम है|

ऐसे में सोमवार रात को ही एसडीएम अनुपम आशीष टोप्पो ने देवभोग तहसीलदार समीर शर्मा को अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी सौंप दिया था| आदेश के मुताबिक, मंगलवार को नायब तहसीलदार अभिषेक अग्रवाल तीन अन्य राजस्व कर्मी के साथ गरियाबन्द जिला अस्पताल पहुंच गए और घण्टों मशक्कत के बाद भी शाम साढ़े 7 बजे तक बॉडी नहीं मिली|

तहसीलदार शर्मा ने कहा कि टीम गरियाबन्द समय पर पहुंची, समय को देखते हुए निर्धारित स्थल पर चिता व अन्य जरूरी सामान का प्रबंध करवा लिया था, कई घण्टे बाद भी शव नहीं मिल सका|

शाम साढ़े 7 बजे बारिश भी शुरू हो गई, अंततः टीम को वापस आना पड़ा, पर साढ़े 8 बजे रात को किसी तरह बॉडी को वाहन में भर के श्मशान घाट तक पहुंचा कर अस्पताल प्रबन्धन ने फोन किया| 40 किमी आ चुकी टीम दोबारा वापस जा कर रात 9 बजे तक मृतक का विधि विधान से अंतिम संस्कार करवाया गया ।

 परिजन ही उठाते हैं संक्रमित का शव

मृत जयराम के शव के साथ हुए नाटकीय घटना से इस बात का खुलासा हो ही गया कि संक्रमण से मौत हुई तो बॉडी को सहेजने परिवार के सदस्यों को ही मशक्कत उठाना पड़ता है.

यही वजह है कि अस्पताल प्रबंधन परिजनों को आने पर ही बॉडी भेजने पर अड़ी रही,पर इस केस में परिजन के बजाए प्रशासनिक टीम पहुंच गई फिर बॉडी को मर्चुरी से शव वाहन तक लाने के लिए जो मशक्कत किया गया उसने व्यवस्था की पोल खोल दिया.

तहसीलदार समीर शर्मा ने कहा कि गरियाबन्द पालिका के स्वीपर को शवदाह में सहयोग के लिए तैयार कर लिया गया था. साढ़े 7 बजे के बाद वह भी भाग गया| जब हमारी टीम लौटी तो किसी तरह अस्पताल प्रबंधन ही शव भेजने का इंतजाम किया.

प्राइवेट ठेकेदार के स्वीपर से ली गई मदद

शाम 4 बजे से कभी स्वीपर का इंतजार तो कभी मुक्तांजलि वाहन के चालक का इंतजार जिला अस्पताल करती रही. स्थानीय जनप्रतिनिधि व अन्य लोगों की मदद से स्वास्थ्य विभाग में निर्माण काम कर रहे एक प्लेसमेंट एजेंसी के स्वीपर को 8 बजे जिला अस्पताल लाया गया. जिसके सहयोग से शव को वाहन व फिर चिता तक पहुंचा कर अंतिम संस्कार किया गया.

मामले में जिला अस्पताल के सिविल सर्जन जी एस टण्डन ने कहा कि है चालक कही गया हुआ था| हमने पूरा प्रयास किया कि किसी तरह अंतिम संस्कार हो जाए।

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